Bachpan Ki Dosti Shayari in Hindi: अगर आप भी बचपन की दोस्ती पर शायरी खोज रहे हैं, तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं। यहाँ आपको bachpan ke dost par shayari के साथ hindi status भी मिलेंगे जिन्हे आप अपने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सप्प या किसी भी सोशल प्रोफाइल पर लगा सकते हो। बचपन का समय जिंदगी का सबसे खूबसूरत और बेफिक्र दौर होता है। न कल की चिंता, न आज की भागदौड़, बस दोस्तों का साथ और दिनभर का खेल-कूद। उस दौर में बनाई गई दोस्ती निश्छल और पवित्र होती है, जिसमें कोई लालच या दिखावा नहीं होता। आज की इस मतलबी दुनिया में जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वो पुराने दोस्त और उनकी यादें ही हमारे चेहरे पर एक सच्ची मुस्कान लाती हैं। आइए, इस लेख के माध्यम से बचपन की उन अनमोल यादों को dosti shayari के जरिए दोबारा जीने की कोशिश करते हैं।
Bachpan Ki Dosti Shayari in Hindi
आज जब हम बड़े हो गए हैं, तो हमें एहसास होता है कि उस समय के दोस्त ही सबसे सच्चे थे। आजकल की दुनिया में तो लोग सिर्फ जरूरत के वक्त याद करते हैं। ऐसे दौर में जहां jhote doston par shayari लिखने की नौबत आ जाती है, वहां बचपन के उन सच्चे दोस्तों की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ जाती है जो हमारे सीधेपन का फायदा नहीं उठाते थे।
वो बचपन की दुश्मनी और मिनटों में मान जाना,
याद आता है हर छोटी बात पर खिलखिलाकर मुस्कुराना।
ना कोई शर्त थी, ना कोई मतलब था उस रिश्ते में,
बहुत याद आता है वो यारों के साथ गुजरा जमाना।

कागज़ की कश्ती थी और पानी का किनारा था,
खेल-कूद की दुनिया में बस दोस्तों का सहारा था।
कहाँ आ गए हम इस समझदारी के दलदल में,
वो नासमझी का बचपन ही कितना प्यारा था।
जेबें खाली थीं फिर भी अमीर हुआ करते थे,
दोस्तों के साथ हम भी तकदीर के सिकंदर हुआ करते थे।
अब तो लाखों कमा कर भी वो खुशी नहीं मिलती,
जो बचपन में एक रुपये की टॉफी बांटकर मिला करती थी।
मिट्टी में खेलते थे पर दिल साफ हुआ करते थे,
छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बेहिसाब हुआ करते थे।
उंगली मिलाकर ‘कुट्टी’ करना और फिर ‘अब्बा’ कह देना,
वो बचपन के दोस्त भी कमाल हुआ करते थे।
न कोई कद्र थी वक्त की, न कोई कमाने की फिक्र थी,
हर खेल की शुरुआत में बस तेरे-मेरे नाम का जिक्र था।
लौट आए वो बचपन का साया फिर से एक बार,
जहाँ दिल में सिर्फ मोहब्बत और दोस्तों का फिक्र था।
आधी छुट्टी की घंटी बजते ही जो शोर मचता था,
दोस्तों के टिफिन पर ही सारा हक अपना बनता था।
आज महंगे होटलों में भी वो स्वाद नहीं मिलता,
जो बचपन में दोस्तों के झूठे निवाले में मिलता था।
स्कूल की वो आखिरी बेंच और दोस्तों का जमावड़ा,
टीचर्स की डांट और फिर मिलकर मुस्कुराना।
किताबें तो बहाना थीं असल में स्कूल जाने का,
असली मकसद तो था दोस्तों के साथ वक्त बिताना।
बचपन के दोस्त शायरी हिंदी में
देखा जाए तो वो दोस्त हमारे लिए एक दूसरे परिवार की तरह ही थे। आज के समय में जहां हम family shayari in hindi पढ़कर अपने परिवार के प्रति प्यार जताते हैं, वहीं बचपन के उन दोस्तों को याद करना भी परिवार को याद करने जैसा ही सुकून देता है। वे दोस्त हमारे सुख-दुख के ऐसे साथी थे, जिन्होंने हमें निस्वार्थ भाव से प्यार करना सिखाया।
वो बारिश का पानी और स्कूल से आते ही भीग जाना,
छतरी होने पर भी जानबूझकर कीचड़ में कूद जाना।
दोस्तों के साथ मिलकर जो शोर मचाते थे हम,
याद आता है बचपन का वो हसीन फसाना।

कट्टम-जीरो का वो खेल और कॉपियों के आखिरी पन्ने,
दोस्त ही थे हमारे सुख-दुख के सच्चे गवाह बनने।
अब तो बस मेसेज पर हाल-चाल पूछ लेते हैं,
वरना पहले तो निकल पड़ते थे सीधे उन्हें मिलने।
धूप हो या छाँव, हम बस दौड़ पड़ते थे,
एक आवाज़ पर दोस्तों की, हम घर से निकल पड़ते थे।
न कोई अपॉइंटमेंट था, न कोई मिलने का बहाना,
हम तो बस शाम होते ही गलियों में सजते थे।
वक्त बदला, शहर बदले और बदल गए ठिकाने,
पर आज भी दिल को सुकून देते हैं वो किस्से पुराने।
जब भी बैठता हूँ तन्हाई में मुस्कुरा देता हूँ,
याद आते हैं जब बचपन के वो यार दीवाने।
अब तो सिर्फ तस्वीरों में ही वो मुस्कान दिखती है,
बचपन के दोस्तों की यारी अब कहाँ बिकती है।
कमा लिए हैं पैसे इस मतलबी दुनिया में बहुत,
पर उन दोस्तों के बिना जिंदगी अधूरी सी लगती है।
यादों के झोंके जब भी हवा बनकर आते हैं,
मुझे फिर से बचपन की उन गलियों में ले जाते हैं।
जहाँ मेरा यार खड़ा रहता था मेरा इंतजार करने,
वो पल आज भी आँखों में आँसू लाते हैं।
दूरियाँ बढ़ गईं तो क्या हुआ, रिश्ता आज भी वही है,
बचपन के दोस्तों की जगह दिल में सबसे सही है।
भले ही रोज़ बात नहीं होती इस मसरूफियत में,
पर तुम्हारी याद दिल से एक पल भी जुदा नहीं हुई है।
कंचे खेलना, गिल्ली-डंडा और वो छुपन-छुपाई,
दोस्तों के साथ मिलकर हर रोज़ एक नई आफत आई।
माँ की डांट से जब दोस्त हमें बचाते थे,
सच में वो यारी थी भगवान की सबसे बड़ी कमाई।
Bachpan Ke Doston Par Hindi Status
चेहरे पर दिखावे का नकाब नहीं होता था,
बचपन की दोस्ती का कोई हिसाब नहीं होता था।
जो कह दिया दिल से, बस वही सच था,
उस दौर की वफादारी का कोई जवाब नहीं होता था।

आज स्टेटस और प्रोफाइल देखकर लोग हाथ मिलाते हैं,
बचपन के दोस्त तो बस गले से लगा लेते हैं।
उन्हें फर्क नहीं पड़ता तुम क्या कमाते हो,
वो तो आज भी तुम्हें पुराने नाम से बुलाते हैं।
थक गया हूँ ऐ जिंदगी इस समझदारी के सफर से,
मुझे फिर से वही बचपन का इतवार दे दे।
छीन ले ये सन्नाटे और ये बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ,
मुझे फिर से मेरे वो बेफिक्र यार दे दे।
बचपन के वो यार ही सबसे बड़े हकीम थे,
जिनके साथ रहकर हमारे सारे गम यतीम थे।
न कोई डॉक्टर की फीस थी, न डिप्रेशन का नाम,
दोस्तों के साथ हँसना ही सारे दुखों का इलाज था।
जिंदगी के इस सफर में दोस्त तो बहुत मिले,
कुछ दिल में उतर गए, कुछ से हुए शिकवे-गिले।
पर जो बात बचपन के उन लंगोटिया यारों में थी,
वो नफरत के इस दौर में फिर कभी न खिले।
टूट जाते थे खिलौने तो हम मिलकर जोड़ लेते थे,
दोस्तों की खातिर हम घर का रास्ता मोड़ लेते थे।
आज काँच के रिश्तों को बचाने में दम निकलता है,
बचपन में तो हम गुस्से में भी बस उंगली मरोड़ लेते थे।
न कोई संडे का इंतज़ार था, न मंडे का कोई डर था,
दोस्तों की टोली ही हमारा असली घर था।
जेब में भले ही एक ढेला न हो उस दौर में,
पर यारों के साथ हर रास्ता बड़ा बेअसर था।
साइकिल की उस एक सीट पर तीन-तीन का बैठ जाना,
हैंडल डगमगाने पर भी ज़ोर-ज़ोर से खिलखिलाना।
गिरे भी अगर तो दर्द का एहसास तक न हुआ,
क्योंकि दोस्त खड़े थे धूल झाड़कर गले लगाने।
बचपन की दोस्ती एक ऐसी दौलत है, जिसे वक्त की धूल भी धुंधला नहीं कर सकती। जिंदगी के इस सफर में भले ही हम सब अपने-अपने रास्तों पर आगे निकल गए हैं और रोजमर्रा की व्यस्तताओं में फंस गए हैं, लेकिन दिल के किसी कोने में वो बचपन का यार आज भी जिंदा है। सोशल मीडिया के इस दौर में भले ही हम नए लोगों से जुड़ते रहें, लेकिन जो सुकून बचपन की उन गलियों और पुराने दोस्तों की यादों में है, वो और कहीं नहीं मिल सकता। इसलिए, अगर आज भी आपका कोई बचपन का दोस्त आपके संपर्क में है, तो उसे एक बार फोन जरूर करें और उन सुनहरे दिनों को फिर से याद करें।